
कैफे के बाहर की तपती धूप और आरांश की वो नशीली आँखें... श्राविका के दिमाग में गंदे ख्यालों का एक पूरा ट्रैफिक जैम लग गया था।
'सजेस्ट? सीरियसली?' श्राविका के मन में आया कि वो कहे— 'मेरा बस चले तो मैं सजेस्ट करूँ कि ये सेक्सी सा दिखने वाला बंदा मुझे ही अपने लंच में खा ले!' उसे लगा जैसे वो उस कैफे के काउंटर पर लेट जाए और आरांश को तब तक खुद पर दावत उड़ाने दे, जब तक उसका जी न भर जाए। आरांश के उस कसरती जिस्म और सांवली रंगत को देखकर श्राविका के अंदर lust की लहरें उठ रही थीं।

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