
"बस इतना ही, विक्की। आज रात मैं यहीं रुकूँगा, तुम जा सकते हो," आरांश ने अपनी भारी आवाज़ में कहा। उसकी चमचमाती बेंटले जैसे ही इनायत के आलीशान पेंटहाउस के सामने रुकी, विक्की ने फौरन उतरकर दरवाज़ा खोला।
श्राविका को अपने होटल के कमरे में बुलाकर उसके साथ वो 'जुनूनी' रात बिताए पूरा एक महीना बीत चुका था। आरांश उसे एक पल के लिए भी भूल नहीं पाया था। उसे आज भी श्राविका के जिस्म की वो महक और उसके होंठों का वो स्वाद याद था। वो उसे दोबारा देखने के लिए तड़प रहा था, लेकिन 'राठौड़ एंटरप्राइजेज' जैसे विशाल साम्राज्य का वारिस होना कोई मामूली बात नहीं थी। दिन-रात मीटिंग्स, फाइलों और करोड़ों की डील्स में ऐसे बीते जैसे पलक झपकते ही वक्त निकल गया हो।

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