
"छोड़ो इनायत, ये सब बातें ज़रूरी नहीं हैं। तुम जाओ और अच्छे से तैयार हो जाओ। आज हम बाहर चलेंगे और कुछ मज़े करेंगे... बिल्कुल वैसे ही जैसे कॉलेज के दिनों में करते थे," आरांश ने कहा। वो चाहकर भी उसे सच बताकर इस वक्त तोड़ना नहीं चाहता था, क्योंकि इनायत पहले से ही बहुत कमज़ोर लग रही थी।
"बिल्कुल पुराने दिनों की तरह?" इनायत ने अपनी पतली कमर को आरांश के जिस्म से रगड़ते हुए पूछा। उसकी नज़रों में एक पुरानी चमक लौट आई थी।

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